सिस्टम की हार: अब चंदे के पैसों से बनेगी सड़क
छुरिया/राजनांदगांव : "नेता आते हैं, हाथ जोड़ते हैं, वादा करते हैं और फिर 5 साल के लिए गायब हो जाते हैं।" यह दर्द है राजनांदगांव जिले के ग्राम रामपुर-महाराजपुर के ग्रामीणों का। आजादी के अमृत काल में भी यहां के लोग एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। शासन और प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर अब ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया है।
पूर्व से वर्तमान तक... सिर्फ आश्वासनों का खेल
ग्रामीणों का आक्रोश केवल वर्तमान स्थिति को लेकर नहीं, बल्कि सालों से मिल रहे धोखे को लेकर है :
- पूर्व विधायक छन्नी साहू का कार्यकाल: ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू ने अपने कार्यकाल में बड़े-बड़े दावे किए थे। उन्होंने जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन कार्यकाल खत्म हो गया और वो आश्वासन सिर्फ कागजों और बातों तक ही सीमित रह गए।
- वर्तमान विधायक भोलाराम साहू पर वादाखिलाफी का आरोप: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वर्तमान विधायक भोलाराम साहू चुनाव के समय वादे करने में पीछे नहीं रहते, लेकिन जनप्रतिनिधि बनते ही वे गांव की सुध लेना भूल गए। पिछले 10 वर्षों से इस सड़क की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है।
"जनप्रतिनिधि हमारे गांव आते-आते थक गए और हम उन्हें अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते थक गए, लेकिन 10 साल बाद भी गढ्ढे नहीं भरे।" — ग्रामीणों की सामूहिक आवाज
जब सरकार और सिस्टम सो गया, तो ग्रामीणों ने आत्मसम्मान का रास्ता चुना है। गांव वालों का कहना है कि अब वे नेताओं के सामने हाथ नहीं फैलाएंगे। ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि वे आपस में चंदा (स्वैच्छिक दान) इकट्ठा करेंगे और अपने पैसों से जर्जर सड़क की मरम्मत करवाएंगे। यह फैसला इलाके के जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग (PWD) के गाल पर एक जोरदार तमाचा है।
क्यों है यह सड़क की स्थिति बेहद गंभीर?
- जर्जर हालत : सड़क पर इतने बड़े गढ्ढे हैं कि आए दिन हादसे हो रहे हैं।
- मरीजों और छात्रों की मुसीबत: एम्बुलेंस गांव तक आने में कतराती है और स्कूली बच्चों को कीचड़ और धूल से होकर गुजरना पड़ता है।
- आर्थिक नुकसान: किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


