मगरमच्छ से भिड़ गया बालक! पिता की जान बचाने : राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित

अजय राज बना ‘राष्ट्रीय बाल वीर’ — राष्ट्रपति ने किया सम्मान

उत्तर प्रदेश : आगरा ज़िले की बाह तहसील के एक छोटे से गांव झरनापुरा से निकली यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। यह कहानी है अजय राज की - एक ऐसे बालक की, जिसने न उम्र देखी, न डर को मौका दिया और सीधे मौत से भिड़ गया।

अजय राज भीड़ गया मगरमछ से

झरनापुरा गांव जहां से उठी वीरता की गूंज :-

बाह तहसील का झरनापुरा गांव सामान्य-सा ग्रामीण इलाका है, जहां लोग खेती, पशुपालन और मेहनत-मजदूरी से जीवन यापन करते हैं। इसी गांव में रहते हैं बंटू उर्फ वीरभान, जिनका बेटा है अजय राज। यह वही गांव है, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है - वजह है अजय का असाधारण साहस। घटना उस दिन की है, जब अजय के पिता रोज़ की तरह बकरियां चराने नदी किनारे गए थे। ग्रामीण इलाकों में नदी जीवन का हिस्सा होती है- पानी, जानवर, खेती, सब कुछ उसी पर निर्भर करता है। पानी भरने के लिए जैसे ही वे नदी में उतरे, किसी को अंदाज़ा नहीं था कि मौत घात लगाए बैठी है।
               नदी में उतरते ही अचानक एक विशाल मगरमच्छ ने हमला कर दिया। तेज़ झटके के साथ उसने अजय के पिता को जकड़ लिया और पानी में खींचने लगा। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी। अजय ने पास पड़ा एक डंडा उठाया और बिना एक पल सोचे नदी में छलांग लगा दी। जहां बड़े-बड़े लोग कदम रखने से डरते हैं, वहां एक बालक मगरमच्छ से भिड़ गया। अजय ने पूरी ताकत और सूझबूझ से मगरमच्छ पर प्रहार किया।लगातार हमलों से मगरमच्छ घायल हुआ और अंततः उसने अजय के पिता को छोड़ दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीर बाल दिवस 2025

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी अजय राज के साथ वीर बाल दिवस के अवसर पर सभी बाल वीरों से मिले और उन्हें राष्ट्र निर्माण हेतु प्रेरणा दिए।

अजय की वीरता की कहानी राष्ट्रपति भवन में महामहिम द्रौपदी मुर्मू तक पहुंची :- 

भारत की राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने अजय राज को
राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक बच्चे को नहीं, बल्कि साहस, संस्कार और परिवार के प्रति कर्तव्य को मिला सम्मान है।
                अजय ने यह साबित कर दिया कि वीरता उम्र नहीं देखती। आज जब बच्चे मोबाइल और स्क्रीन में उलझे रहते हैं, अजय की कहानी बताती है कि संस्कार और साहस आज भी जीवित हैं।

 लेखक : मेकल साहू  

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