ग्राम पंचायत महाराजपुर में बिरसा मुंडा जयंती धूमधाम से मनाई गई, ग्रामीणों में दिखा उत्साह

 ग्राम पंचायत महाराजपुर में गुरुवार को महान जननायक धरती आबा बिरसा मुंडा की जयंती बड़े ही उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे गांव में आदिवासी वीर सपूत बिरसा मुंडा के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण दिखाई दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती क्षमा रमेश तिवारी ने की। साथ ही उपसरपंच शकीला कंवर एवं अनेक पंचगण — उर्वशी साहू, पीलूराम कंवर, परमेश्वर, शीला बाई, अमरोतिन बाई, रीनाबाई, दुर्गाबाई कंवर, बुधा बाई साहू, छबिल सिंह कंवर, रूपकुंवर बाई, अहिल्याबाई, बिमो बाई, आईराम नेताम और चम्पाबाई नेताम—कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

इसके अलावा क्षेत्र की जनपद सदस्य चुनियाबाई कंवर भी कार्यक्रम में पहुँचीं। युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व सौरभ सोमानी भईया ने किया, जिनकी उपस्थिति से युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

विश्लेषण :-

बिरसा मुंडा (1875–1900) भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली जननायकों में गिने जाते हैं। बेहद कम उम्र में उन्होंने ब्रिटिश शासन और ज़मींदारी शोषण के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा किया। समाज को जागृत करने के उनके प्रयासों ने उन्हें "धरती आबा" का सम्मान दिलाया। उनके नेतृत्व में उठे “उलगुलान” आंदोलन ने न केवल आदिवासी समाज को एकजुट किया, बल्कि अंग्रेजों को भी आदिवासी क्षेत्रों में कानूनों और नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। भूमि-सुरक्षा, सामाजिक सुधार और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करना उनके आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। आज जब समाज आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, बिरसा मुंडा का संदेश—“धरती हमारी माँ है, इसकी रक्षा हमारा धर्म है”— और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उनका जीवन हमें बताता है कि संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, साहस और एकता से समाज अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

कार्यक्रम में ग्रामीणों का उत्साह :-


ग्राम पंचायत महाराजपुर में आयोजित यह समारोह न सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और इतिहास के सम्मान का प्रतीक भी रहा। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बिरसा मुंडा के योगदान से परिचित कराने के ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए। महाराजपुर गांव में यह आयोजन बताते हैं कि आज भी बिरसा मुंडा केवल आदिवासी समाज के नायक नहीं, बल्कि पूरे भारत के प्रेरणास्रोत हैं।
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