राजनांदगांव में मानवता शर्मसार : नाबालिग प्रसूता के नवजात शिशु को बेचने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) : सूत्रों के अनुसार संस्कारधानी कहे जाने वाले राजनांदगांव जिले से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के एक निजी अस्पताल, कृष्णा हॉस्पिटल, पर नाबालिग लड़की की डिलीवरी के बाद उसके नवजात बच्चे की कथित तस्करी और सौदेबाजी का गंभीर आरोप लगा है। इस सनसनीखेज मामले ने जिले के स्वास्थ्य महकमे, पुलिस प्रशासन और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

कृष्णा हॉस्पिटल, पर नाबालिग लड़की की डिलीवरी के बाद उसके नवजात बच्चे की कथित तस्करी

प्रमुख बिंदु: क्या है पूरा मामला?

  • नाबालिग पीड़िता : डोंगरगढ़ क्षेत्र की एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की।
  • डिलीवरी का स्थान : कृष्णा हॉस्पिटल, राजनांदगांव।
  • तारीख: 8 सितंबर को हुआ था 'अनमैच्योर' बच्चे का जन्म।
  • मुख्य आरोप : POCSO एक्ट का उल्लंघन, सरकारी डॉक्टर की निजी अस्पताल में संलिप्तता और नवजात की बिक्री।

नियमों को ताक पर रखकर प्राइवेट अस्पताल में हुई डिलीवरी :

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम कानून की धज्जियां उड़ाने जैसा है। 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी को प्रसव के लिए कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। नियमानुसार, किसी भी नाबालिग के गर्भवती होने या डिलीवरी की सूचना तत्काल संबंधित थाने को देना अनिवार्य है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने POCSO एक्ट की इस अनिवार्य प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया। हैरानी की बात यह है कि डिलीवरी शासकीय मेडिकल कॉलेज में पदस्थ एक महिला डॉक्टर द्वारा की गई, जो अपनी ड्यूटी छोड़कर निजी अस्पताल में प्रैक्टिस कर रही थीं।

ऐसे हुआ सनसनीखेज तस्करी का खुलासा :

बच्चे की कथित बिक्री का राज तब खुला जब महोबे हॉस्पिटल में एक दंपति ने फर्जी माता-पिता बनकर बच्चे का 'बर्थ सर्टिफिकेट' (जन्म प्रमाण पत्र) बनवाने की कोशिश की। चूंकि उस बच्चे की डिलीवरी वहां नहीं हुई थी, इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने दस्तावेज़ों पर आपत्ति जताई। इसी विवाद के बाद मामले की जानकारी बाहर आई और प्रशासन तक पहुंची।

रिकॉर्ड गायब : क्या सबूत मिटाने की हो रही है कोशिश?

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जिला प्रशासन और पुलिस ने जांच शुरू की, तो कृष्णा हॉस्पिटल से जुड़े अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड गायब मिले। चर्चा है कि रसूखदारों को बचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर रहा है।

​"इस मामले में कलेक्टर के निर्देश पर जांच टीम गठित कर दी गई है। सभी संबंधित डॉक्टरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और गायब रिकॉर्ड्स की तलाश जारी है।" — प्रशासनिक सूत्र

 

मीडिया मैनेजमेंट और सिंडिकेट का आरोप!

खबर यह भी है कि इस पूरे मामले को दबाने के लिए एक कथित 'मीडिया सिंडिकेट' सक्रिय था। चर्चा है कि लाखों रुपये के लेनदेन के जरिए खबर को दबाने की कोशिश की गई। यदि यह सच है, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भी एक बड़ा धब्बा है। आशंका जताई जा रही है कि शहर में डॉक्टरों और बिचौलियों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है जो गरीब और असहाय परिवारों को अपना शिकार बना रहा है।

निष्कर्ष : 

राजनांदगांव का यह केस केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की विफलता है जो बच्चों और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी दबाव के इस 'बच्चा चोर गिरोह' और 'मेडिकल सिंडिकेट' का पर्दाफाश करे।

Keywords : Rajnandgaon News, Chhattisgarh Crime News, Child Trafficking Rajnandgaon, Krishna Hospital Case, Minor Delivery Case, CG Police, Rajnandgaon Collector News, नवजात शिशु तस्करी, राजनांदगांव समाचार, छत्तीसगढ़ ब्रेकिंग न्यूज़।

और नया पुराने
Advertisements

संपर्क फ़ॉर्म