स्वच्छ भारत मिशन के बावजूद प्लास्टिक-कचरे से कराहती प्रकृति

स्वच्छ भारत पर भारी लापरवाही! छुरिया के गहिराभेड़ी में कुछ गैर-जिम्मेदार लोगों द्वारा खुलेआम फैलाया जा रहा प्लास्टिक कचरा

छुरिया (राजनांदगांव)। एक ओर केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ शासन स्वच्छ भारत अभियान के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें इस अभियान को खुलेआम ठेंगा दिखा रही हैं। ताजा मामला छुरिया ब्लॉक के ग्राम गहिराभेड़ी का है, जहाँ सोसायटी के पास और पहाड़ी से लगे रोड किनारे प्लास्टिक व कूड़े का ढेर फैलाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के छुरिया गहिराभेड़ी में सड़क किनारे फैला प्लास्टिक कचरा, टिपागढ़ मंदिर मार्ग के पास स्वच्छता अभियान की अनदेखी

             इस मार्ग से होकर प्रसिद्ध टिपागढ़ मंदिर जाने का रास्ता भी गुजरता है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, लेकिन कुछ गैर-जिम्मेदार लोगों ने इसे डंपिंग ज़ोन में बदल दिया है। सड़क किनारे फैले प्लास्टिक, खाने-पीने के पैकेट, थर्माकोल और अन्य अपशिष्ट न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए भी शर्मनाक दृश्य बन चुके हैं। स्वच्छ भारत सिर्फ नारा नहीं, जिम्मेदारी है,- वरना प्रकृति कभी माफ नहीं करेगी।
                 सरकार योजनाएँ बनाती है, बोर्ड लगते हैं, अभियान चलते हैं, लेकिन जब तक जनता स्वयं जागरूक नहीं होगी, तब तक स्वच्छ भारत सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा। यह सवाल भी उठता है कि क्या धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक विरासत की रक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है? या फिर समाज को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए? अगर इसी तरह लापरवाही जारी रही तो आने वाली पीढ़ियों को हम क्या विरासत देंगे — कूड़े के ढेर या स्वच्छ प्रकृति? अब समय आ गया है कि प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक भी आगे आएं और गहिराभेड़ी जैसे सुंदर स्थानों को कूड़ाघर बनने से बचाएं।

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