राजनांदगांव। भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMC राजनांदगांव) के MBBS इंटर्न डॉक्टर्स अपने मानदेय (स्टाइपेंड) में वृद्धि की मांग को लेकर 4 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। वर्तमान में इन युवा चिकित्सकों को प्रतिमाह मात्र ₹15,900 का स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जिसे वे अन्य राज्यों में मिलने वाले भत्ते की तुलना में बेहद अपर्याप्त और निराशाजनक मान रहे हैं। कार्य के अनुपात में कम पारिश्रमिक से हताश इंटर्न छात्र अन्य राज्यों की तर्ज पर स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह किए जाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
अपनी मांगों को लेकर आंदोलित इन चिकित्सकों ने ओपीडी (OPD) और नियमित वार्ड ड्यूटी के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं (Casualty Services) का भी पूर्णतः बहिष्कार कर दिया है। चौबीसों घंटे कठिन परिस्थितियों में चिकित्सा सेवा देने वाले इन इंटर्न डॉक्टरों के काम बंद करने से अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। आपातकालीन सेवाओं से डॉक्टरों के हटने के कारण मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि शासन की बेरुखी ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस गतिरोध को सुलझाने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। हड़ताल के कई दिन बीत जाने के बावजूद शासन, प्रशासन या किसी भी जनप्रतिनिधि ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से संवाद स्थापित करने का प्रयास नहीं किया है। प्रशासनिक उपेक्षा से क्षुब्ध इंटर्न चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए स्टाइपेंड संशोधन का लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि MBBS पाठ्यक्रम के तहत 'कंपल्सरी रोटेटरी इंटर्नशिप' (Compulsory Rotatory Internship) कर रहे ये युवा चिकित्सक अस्पताल की प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ माने जाते हैं। 12 से 24 घंटे की कठिन शिफ्ट में निरंतर ड्यूटी देने के बावजूद इतना कम भत्ता मिलना उनकी मेहनत और समर्पण के साथ अन्याय है। वर्तमान महंगाई के दौर में यह मानदेय दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर्स भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर होती जा रही है। यदि राज्य शासन और स्वास्थ्य विभाग ने शीघ्र ही इस पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो यह गतिरोध पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।


