राजस्व कार्यों की समीक्षा में कलेक्टर की सख्ती, स्वामित्व योजना और सीमांकन प्रकरणों पर बड़ा आदेश

RAJNANDGAON : राजनांदगांव जिले में आमजनों की राजस्व संबंधी समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी निराकरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने अपनी कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में बुधवार को राजनांदगांव के कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिले के सभी राजस्व निरीक्षकों की एक महत्वपूर्ण और विस्तृत समीक्षा बैठक ली। इस उच्च स्तरीय बैठक में सीमांकन, स्वामित्व योजना, नक्शा बंटांकन, नामांतरण और बंटवारा जैसे अति संवेदनशील और आम जनता से सीधे जुड़े राजस्व प्रकरणों की बिंदुवार समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त लहजे में निर्देशित किया है कि राजस्व विभाग के कार्य जनसामान्य की रोजमर्रा की जिंदगी और उनके कानूनी अधिकारों से गहराई से जुड़े होते हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी लंबित प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

Collector Jitendra Yadav Meeting

बैठक के दौरान कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने जिले में लंबित सीमांकन प्रकरणों पर विशेष फोकस करते हुए उनकी वर्तमान स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। समीक्षा के दौरान यह आंकड़े प्रस्तुत किए गए कि जिले में सीमांकन के कुल 1 हजार 440 प्रकरण दर्ज हुए थे, जिनमें से राजस्व अमले ने 1 हजार 202 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर लिया है, जबकि 238 प्रकरण अभी भी शेष हैं। इन शेष बचे 238 मामलों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने सभी राजस्व निरीक्षकों को एक सख्त डेडलाइन दी है कि आगामी 15 जून 2026 तक इन सभी प्रकरणों का अनिवार्य रूप से निराकरण कर लिया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण मामलों का त्वरित निराकरण होने से न केवल आम जनता की भूमि संबंधी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का स्थाई समाधान होगा, बल्कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में होने वाले अनावश्यक जमीनी विवादों में भी भारी कमी आएगी।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्वामित्व योजना' के प्रभावी जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी तहसीलों के लिए एक नया और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रत्येक तहसील से कम से कम 10-10 ग्रामों के प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार कर उनके 'अधिकार अभिलेख' निर्माण और वितरण की कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों का रिकॉर्ड पूरी तरह से व्यवस्थित हो सके और नागरिकों को राजस्व सुविधाओं का सुगम लाभ मिल सके। इसी दौरान, जब नक्शा बंटांकन के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट कलेक्टर के समक्ष रखी गई, तो जिले में इसकी महज 71.58 प्रतिशत प्रगति पाए जाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें कार्य में तत्काल तेजी लाने और नक्शा बंटांकन के सभी लंबित प्रकरणों को युद्धस्तर पर शीघ्र पूरा करने की सख्त हिदायत दी है।

बैठक के अंतिम चरण में कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने पूरे राजस्व अमले को जनहित में पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का मूलमंत्र दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक कुशल राजस्व प्रशासन वही है जो आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचाए और उनके अधिकारों को सुरक्षित रखे। इस अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन के कई आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेमप्रकाश शर्मा और डिप्टी कलेक्टर श्री विश्वास कुमार सहित जिले के सभी राजस्व निरीक्षक और संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। प्रशासन की इस सख्ती के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि राजनांदगांव जिले में राजस्व प्रकरणों के निपटारे में अभूतपूर्व तेजी आएगी और लंबित मामलों का अंबार जल्द ही समाप्त होगा।

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