ग्राम कल्लूटोला में शासकीय भूमि (चारा भूमि) को कोटवार द्वारा अपने नाम पर धोखे से करने का आरोप कल्लूटोला के ग्रामवासी कोटवार नूरसिंग पर लगा रहे हैं। इसी विवाद की जाँच करने 9/05/2026 को जाँच करने पटवारी प्रशांत ठाकुर सहित 2 पटवारी ग्राम कल्लूटोला में पहुंचे, गाँव में तनाव का माहौल बना हुआ था। ग्राम वासियों ने जाँच अधिकारी के समक्ष बताया कि कोटवार नूरसिंग ने शांति बाई के जमीन का नोटिस दिखाकर उसके नीचे दबे स्वयं के अर्थात नूरसिंग के नाम पर हो रहे सरकारी जमीन के नोटिस (दस्तावेज) पर बिना बताए हमारे सिग्नेचर करवा लिए।
हस्ताक्षर करने वालों में लगभग 10 लोगों के नाम हैं। लेकिन हस्ताक्षर करने वाले कल्लूटोला गाँव के लोग जाँच अधिकारी के समक्ष बयान दिए कि हमें बिना किसी जानकारी के गुमराह में रखकर एवं शांति बाई नामक नामित दस्तावेज पर हस्ताक्षर करो बताकर किस दस्तावेज में हस्ताक्षर कराया ये हमें नहीं पता था, लेकिन जब लगभग 9 एकड़ की शासकीय भूमि जिसका उपयोग चारा भूमि के रूप में होता है, जहाँ मवेशियों के चारा पानी के ले एकमात्र जगह है उसे ही कोटवार नूरसिंग के नाम पार कर दिया गया है।
जब गाँव वालों को यह बात चली तो मीटिंग बुलाया गया एवं हस्ताक्षर करने वालों से पूछा गया तब उन्हें आता चला कि हमें भिन्न दस्तावेज दिखाकर किसी दूसरे दस्तावेज में हमसे हस्ताक्षर करवा कर शासकीय भूमि को कोटवार के नाम पर कर दिया गया।
गाँव वालों का कहना है कि यहाँ तक कि ग्राम पंचायत कल्लूटोला से यह प्रस्ताव भी नहीं हुआ है और ना ही गाँव में इस शासकीय भूमि के कोटवार नूरसिंग के नाम पार रजिस्ट्रेशन के नोटिस, इश्तहार गाँव में नहीं लगाया गया था, आरोप है कि यहाँ तक मुनादी भी नहीं करवाया गया था। जब चारा भूमि का स्थानांतरण कोटवार के नाम पर हो गया तो उसके पश्चात ज़ब गाँव वालों ने अपने थाने में जाकर धोखाधड़ी की शिकायत की एवं साथ-साथ तहसीलदार, कलेक्टर से भी शिकायत किए।
वहीं कोटवार का पक्ष देखें तो कोटवार का कहना है कि ये लोग जानते थे जब हस्ताक्षर किए लेकिन गाँव के बुजुर्गों और अन्य लोगों का कहना है कि हमें गुमराह में रखकर यह काम हुआ है, और कोटवार को मीटिंग में भी बुलाने पर वह नहीं आता है। अब प्रश्न यह है, यदि गाँव वालों के आरोप सत्य हैं तो अबतक प्रशासन द्वारा कार्यवाही क्यों नहीं किया जा रहा। आपके इस पर क्या विचार हैं कमेंट करके जरूर बताइये।




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