हमन अपन रोज के भाग-दौड़, पइसा-कौड़ी अउ रुतबा के पाछू अतेक बउराए रहिथन कि कभू ऊपर मुड़ी उठा के अगास डहर नइ देखन। फेर जे दिन हमन ब्रह्मांड के गहराई ल समझबो, त एक ठन अब्बड़ बड़े अउ कड़वा सच आघू आही— 'जऊन चीज बने हे, ओखर अंत घलो निश्चित हे।' आज हमन इही बिसय म गोठियाबो कि का हमर अतेक सुग्घर पृथ्वी के अंत नज़दीक आवत हे? अउ विज्ञान एखर बारे म का कहिथे।
१. सूर्य के गुस्सा :-
सबसे सिरतोन बात जे विज्ञान कहिथे, वो ये हे कि हमर सूर्य देवता हमेशा अइसने जवान नइ रहय। आज ले करीब 5 अरब साल बाद सुरुज के अंदर के ईधन (हाइड्रोजन) सिरा जाही। तब सुरुज ह फूलना चालू करही अउ एक ठन बिसाल 'लाल राक्षस' (Red Giant) बन जाही। ओखर आकार अतेक बड़े हो जाही कि वो ह बुध, शुक्र अउ अंत म हमर पृथ्वी ल सवांग लील जाही। हमर ये सुघ्घर धरती पघिल के फेर ले राख अउ गैस बन जाही अउ ग्रह के रूप म एखर वजूद हमेशा बर मिट जाही।२. धरती के जिंवरा क्रोड (Core) के ठंडा होना :-
हमर पृथ्वी म जीवन बचे हे जब ले ओखर पेट (Core) म लोहा अउ निकेल के आगी धधकत हे। इही आगी के सेती धरती म 'मैग्नेटिक फील्ड' (चुंबकीय क्षेत्र) बनथे, जऊन ह सुरुज के खतरनाक किरन (Solar winds) ले हमर हवा-पानी ल बचा के रखथे। फेर धीरे-धीरे धरती के पेट ह ठंडावत हे। जऊन दिन ये पूरा ठंडा जाही, धरती के चुंबकत्व खतम हो जाही अउ मंगल ग्रह जइसे हमर धरती घलो एक ठन सुक्खा, बीरान अउ मरे जइसे लाल चट्टान बन के रह जाही। हवा अउ पानी ल अंतरिक्ष के निर्वात ह खींच लेही।
३. मनखे के अपन खुद के खोदे गड्ढा :-
ये तो होगे ब्रह्मांड के गोठ, फेर हमन (मनखे जात) ल घलो कहुं कम आंके के जरूरत नइ हे! प्रकृति ले पहिली त हमन खुद अपन बिनास के तइयारी म जुरे हन। चाहे वो परमाणु बम के डर होवय, प्रकृति ल नुकसान पहुंचा के ले आए 'क्लाइमेट चेंज' होवय, या फेर एडवांस मशीन अउ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जऊन ह कभू घलो हमर काबू ले बाहिर हो सकत हे। सुरुज ल धरती ल लीले म अरबों साल लगही, फेर मनखे ह अपन करतूत ले ए धरती ले जीवन ल कुछू सौ साल म ही खतम कर सकथे।
४. त फेर हमर जिनगी के का मतलब हे? :-
जब एक दिन सब कुछ राख म मिलना च हे, त फेर अतेक संघर्ष काबर? ये सवाल मन म उठना लाजिमी हे। फेर इही जगा म हमर 'चेतना' के असली परिक्षा हे। ब्रह्मांड के भले कोनो उदेस्य झन होवय, फेर हमन अपन जिनगी के उदेस्य खुद गढ़ सकथन। जब तक हमन जिन्दा हन, ज्ञान के जोत जलावय, नवा पीढ़ी ल सोचे-समझे बर तइयार करय अउ समाज ल बने रद्दा म लेगे के उदिम करय।
आखिरी गोठ :-
अंत म बस अतक च कहे जा सकत हे कि धरती के अंत ह भले नज़दीक होवय, फेर आज के दिन, आज के बखत हमर हाथ म हे। ये ब्रह्मांडीय सच ल जान के डराए के नइ हे, बल्कि अपन आज के जिनगी ल अउ जादा जिम्मेदारी अउ चेतना के संग जिए के जरूरत हे। ब्रह्मांड के अतेक बड़का सन्नाटा म हमर मनखे के चेतना ह एक ठन चराग बरोबर हे, जतका दिन घलो ये जलही, अंधियार ले लड़ते रही।

