'पुष्पा' के स्टाइल में चल रहा था सागौन की तस्करी का खेल! धान के पैरा में छिपा था 'सागौन', वन विभाग की दबिश से मचा हड़कंप
छुरिया : "मैं झुकेगा नहीं..." डायलॉग मारकर लाल चंदन की तस्करी करने वाले 'पुष्पा' का खुमार अब खुज्जी वन परिक्षेत्र के लकड़ी माफियाओं पर भी चढ़ गया है। लेकिन तस्कर यह भूल गए कि सामने वन विभाग की मुस्तैद टीम खड़ी है, जो हर चाल को नाकाम करना जानती है। सोमवार शाम छुरिया के ग्राम बेलरगोंदी में वन विभाग ने एक ऐसी 'सर्जिकल स्ट्राइक' की, जिसने अवैध लकड़ी कारोबारियों की नींद उड़ा कर रख दी है।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई इस बड़ी कार्रवाई में धान के पैरा के नीचे छिपाकर रखी गई बेशकीमती सागौन की 35 नग लकड़ियां बरामद की गई हैं।
धान के पैरा में छिपा रखा था 'सागौन का खजाना' :-
सूत्रों से मिली पक्की खबर के बाद, वन विभाग की टीम ने ग्राम बेलरगोंदी में संतोष वर्मा के निजी खेत में दबिश दी। बाहर से देखने पर वहां सिर्फ धान का पैरा नजर आ रहा था, लेकिन जब वन विभाग ने 'पुष्पा' स्टाइल में छिपाए गए इस राज से पर्दा उठाया, तो अंदर से सागौन की 35 नग मोटी लकड़ियां निकलीं। इस बेशकीमती 'लाल सोने' को देखकर खुद वन अमला भी हैरान रह गया।
खेत मालिक की 'फरारी' ने गहराया सस्पेंस :-
कार्रवाई के दौरान जब कोटवार के माध्यम से खेत मालिक संतोष वर्मा को मौके पर बुलाया गया, तो उन्होंने आने से साफ इनकार कर दिया। ना तो वे पंचनामा के समय उपस्थित हुए और ना ही किसी कागज़ पर हस्ताक्षर किए। उनकी इस 'फरारी' और जांच में सहयोग न करने की नीयत ने उनकी भूमिका को पूरी तरह से संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
राजस्व विभाग की 'सुस्ती' पर उठे सवाल :-
इसी ड्रामे के बीच एक और बड़ा खेल देखने को मिला। खेत के बाहर सड़क किनारे भी इमारती लकड़ी खुलेआम रखी मिली थी। चूंकि मामला सड़क किनारे का था, वन विभाग ने तत्काल राजस्व विभाग को सूचना दी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि सूचना के बाद भी राजस्व अमला मौके पर पहुंचा ही नहीं! नतीजतन, सड़क किनारे रखी लकड़ी पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि, वन विभाग ने अपने अधिकार क्षेत्र की सागौन लकड़ी को फौरन जब्त कर लिया।
किसका था माल और कौन है इसका 'मास्टरमाइंड'?
इस पूरी धाकड़ कार्रवाई को खुज्जी वन परिक्षेत्र के प्रभारी अधिकारी व सहायक वन संरक्षक (प्रशिक्षु) आकाश सिंह ठाकुर ने अपनी टीम के साथ सख्ती से अंजाम दिया।
इस भंडाफोड़ के बाद से पूरे इलाके के लकड़ी माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि धान के पैरा में छिपाए गए इस अवैध सागौन का असली स्रोत क्या है? क्या खेत मालिक ही इसका मास्टरमाइंड है या पर्दे के पीछे से कोई और 'सिंडिकेट' यह खेल चला रहा है? वन विभाग की इस दबिश के बाद आने वाले दिनों में कई और सफेदपोश चेहरों से नकाब उठने की पूरी संभावना है।
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