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जिला स्तरीय 'गौ विज्ञान परीक्षा' का द्वितीय चरण भव्यता के साथ संपन्न, मेधावी छात्रों को बांटे गए गौ-उत्पाद : Rajnandgaon

राजनांदगांव | भारतीय संस्कृति और विज्ञान के समन्वय का प्रतीक 'जिला स्तरीय गौ विज्ञान परीक्षा' का द्वितीय चरण आज पूरे उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस परीक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान की परख करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को गौ-पालन के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व से जोड़ना था। परीक्षा के समापन के बाद विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कार स्वरूप 'गौ विज्ञान किट' (गौ-उत्पाद) वितरित किए गए।

गौविज्ञान परीक्षा 2026 राजनांदगाँव 6

गौविज्ञान परीक्षा 2026 राजनांदगाँव 5

गौविज्ञान परीक्षा 2026 राजनांदगाँव 4

गौविज्ञान परीक्षा 2026 राजनांदगाँव 1

गौविज्ञान परीक्षा 2026 राजनांदगाँव 2

गौविज्ञान परीक्षा 2026 राजनांदगाँव


आंकड़ों में परीक्षा : उत्साहजनक रही उपस्थिति :-

इस अनूठी पहल के प्रति छात्रों में भारी उत्साह देखने को मिला। गौ विज्ञान परीक्षा के प्रथम चरण के लिए जिले भर से कुल 6200 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। प्रथम चरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर विद्यालय और महाविद्यालय स्तर से कुल 328 विद्यार्थी द्वितीय चरण की परीक्षा के लिए पात्र (Selected) पाए गए थे।
            आज आयोजित द्वितीय चरण की परीक्षा में पात्र 328 विद्यार्थियों में से 288 विद्यार्थी उपस्थित रहे और उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ गौ-विज्ञान से जुड़े प्रश्नों को हल किया। यह उपस्थिति दर्शाती है कि युवा पीढ़ी में अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

क्यों जरूरी है 'गौ विज्ञान परीक्षा'? (उद्देश्य और लाभ) :-

आज के आधुनिक दौर में यह परीक्षा मात्र एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है। इसके मुख्य उद्देश्य और लाभ बहुआयामी हैं :
  1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण : अक्सर गौ-सेवा को केवल धर्म से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस परीक्षा के माध्यम से छात्रों को गाय के दूध, गोबर और गोमूत्र में छिपे वैज्ञानिक तत्वों (जैसे औषधीय गुण, जैविक कृषि में महत्व) की जानकारी दी गई।
  2. पर्यावरण संरक्षण : रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए गौ-आधारित कृषि ही एकमात्र विकल्प है। छात्रों को बताया गया कि कैसे गौ-पालन से पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को बचाया जा सकता है।
  3. आत्मनिर्भर भारत : गौ-उत्पाद (जैसे धूपबत्ती, फिनाइल, औषधियां) निर्माण से स्वरोजगार के अवसर कैसे पैदा होते हैं, यह ज्ञान भी इस अभियान का हिस्सा है।

सामाजिक चिंतन : स्वार्थ से ऊपर उठने की जरूरत :-

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं और आयोजकों ने समाज की वर्तमान स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। आज समाज में गौमाता के प्रति एक 'दूरी' और 'स्वार्थपन' घर कर गया है। लोग गाय को तब तक ही पालते हैं जब तक वह दूध देती है। दूध देना बंद करते ही उसे सड़कों पर लावारिस छोड़ दिया जाता है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और गौवंश का अपमान होता है।
​             गौ विज्ञान परीक्षा का एक बड़ा मकसद इस स्वार्थी मानसिकता पर प्रहार करना है। यह बच्चों को सिखाती है कि गाय केवल एक दुधारू पशु नहीं, बल्कि वह चलती-फिरती 'औषधालय' और 'खाद का कारखाना' है। जब बच्चा बचपन से ही गौवंश के आर्थिक और नैतिक महत्व को समझेगा, तभी वह भविष्य में एक जिम्मेदार गौ-पालक और नागरिक बनेगा।

सफल आयोजन में इनका रहा प्रमुख योगदान :-

इस आयोजन को सफल बनाने में जिले के दायित्ववान अधिकारियों और नोडल प्रभारियों की भूमिका सराहनीय रही। उनकी सूची निम्नानुसार है :

क्र.नामपद / दायित्व
1श्री संतोष कुमार वर्माराजनांदगांव जिला नोडल अधिकारी
2श्री मिथलेश वर्माविकासखंड नोडल (राजनांदगांव)
3श्री लक्ष्मण साहूविकासखंड नोडल (छुरिया)
4श्री ईश्वर जोशीविकासखंड नोडल (डोंगरगांव)
5श्री पारस वर्माविभाग संयोजक
6श्री मोनेश कुमारजिला सह-संयोजक


निष्कर्ष :-

​गौ विज्ञान किट वितरण के साथ संपन्न हुआ यह कार्यक्रम एक संकेत है कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो आज का युवा गौ-संस्कृति को अपनाने के लिए तैयार है। आवश्यकता है तो बस ऐसे आयोजनों को निरंतरता देने की, ताकि गौमाता के प्रति श्रद्धा केवल मंदिरों तक सीमित न रहकर हमारे खेतों, रसोइयों और दैनिक जीवन का हिस्सा बने।

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