महाशिवरात्रि 2026 : भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना रूठ जाएंगे महादेव : Chhuriya Times

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की भक्ति का सबसे बड़ा दिन है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में, रायपुर से लेकर बस्तर तक, शिवभक्त इस दिन उपवास और अभिषेक करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनजाने में की गई कुछ छोटी गलतियां आपकी पूजा के फल को शून्य कर सकती हैं? 

हिंदू धर्मग्रंथों और शिवपुराण में महाशिवरात्रि के दिन कुछ कार्यों को वर्जित बताया गया है। आइये विस्तार से जानते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन भक्तों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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शिवलिंग पर कभी न चढ़ाएं ये 5 चीजें :-

शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव 'अघोरी' और 'वैरागी' स्वरूप हैं। उनकी पूजा में कुछ ऐसी चीजें वर्जित हैं जो अन्य देवताओं को प्रिय होती हैं :

1. तुलसी (Tulsi Leaves) : शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने तुलसी के पति शंखचूड़ का वध किया था, इसलिए तुलसी ने स्वयं को शिव पूजन से दूर रखा है।

2. केतकी का फूल (Ketaki Flower) : ब्रह्मा जी के एक झूठ में साथ देने के कारण महादेव ने केतकी के फूल को श्राप दिया था कि वह कभी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

3. सिंदूर या कुमकुम: सौभाग्य का प्रतीक होने के कारण इसे केवल माता पार्वती को अर्पित करें, शिवलिंग पर नहीं।

4. नारियल पानी : शिवलिंग पर नारियल चढ़ाया जा सकता है, लेकिन उसका अभिषेक (पानी) वर्जित है क्योंकि अभिषेक के बाद उसे ग्रहण नहीं किया जा सकता (निर्मल्य)।

खान-पान और व्रत के कठोर नियम :-

महाशिवरात्रि पर केवल उपवास रखना ही काफी नहीं है, बल्कि सात्विकता का पालन अनिवार्य है।
1. तामसिक भोजन का त्याग : इस दिन लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा का स्पर्श भी वर्जित है।
2. चावल और अनाज : यदि आप पूर्ण उपवास (व्रत) रख रहे हैं, तो अन्न ग्रहण न करें। फलाहार (फल और दूध) ले सकते हैं।
3. काले वस्त्र न पहनें : महादेव को काला रंग प्रिय नहीं माना जाता (पूजा के समय)। कोशिश करें कि सफेद, लाल या केसरिया रंग के सूती वस्त्र ही पहनें।

शास्त्रोक्त श्लोक और प्रमाण :-

भगवान शिव की पूजा में शुद्धता का महत्व बताते हुए शास्त्रों में कहा गया है :

"अर्चयेच्छिवमव्यग्रं बिल्वपत्रैः सुशोभनैः। न दद्यात् केतकीं तस्मै न च कुंकुममर्चयेत्॥"

अर्थ : महादेव की पूजा एकाग्र मन से सुंदर बेलपत्रों द्वारा करनी चाहिए। उन्हें कभी भी केतकी का फूल और कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए। 

शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता) में स्पष्ट उल्लेख है कि शिव पूजा में भाव प्रधान है, लेकिन निषेध वस्तुओं का प्रयोग दोष उत्पन्न करता है।

महाशिवरात्रि पर क्यों जरूरी है 'रात्रि जागरण'? :-

कई लोग केवल दिन में पूजा करके सो जाते हैं, जो कि गलत है। महाशिवरात्रि का अर्थ ही है 'शिव की महान रात्रि'

1. चार पहर की पूजा : इस दिन रात्रि के चार पहर में शिव का अभिषेक करने का विधान है।

2. शयन न करें : मान्यता है कि इस रात्रि में जो भक्त जागकर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करता है, उसकी कुंडली में ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) :-

प्रश्न 1 : महाशिवरात्रि के दिन बाल कटवाना या नाखून काटना सही है?

उत्तर : हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, किसी भी बड़े व्रत या त्यौहार के दिन बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना या नाखून काटना वर्जित माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

प्रश्न 2 : क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) में महाशिवरात्रि का व्रत रख सकते हैं?

उत्तर : आप मानसिक जाप कर सकते हैं और व्रत रख सकते हैं, लेकिन मंदिर जाने या शिवलिंग को छूने की मनाही है। आप घर पर रहकर ही भगवान शिव का ध्यान करें।

प्रश्न 3 : शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का सही तरीका क्या है?

उत्तर : हमेशा 'तांबे' के पात्र को छोड़कर (दूध के लिए तांबा वर्जित है) पीतल या चांदी के पात्र से कच्चा दूध चढ़ाएं। उबला हुआ दूध न चढ़ाएं।

प्रश्न 4 : महाशिवरात्रि कितने दिनों में आती है?

उत्तर : महाशिवरात्रि वर्ष में केवल एक बार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। हालांकि हर महीने में आने वाली चतुर्दशी को 'मासिक शिवरात्रि' कहते हैं।

महाशिवरात्रि महादेव को प्रसन्न करने का सरलतम मार्ग है। यदि हम शास्त्रों में बताए गए नियमों (क्या न करें) का पालन करते हुए सच्ची श्रद्धा से 'एक लोटा जल' भी अर्पित करें, तो भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। इस दिन विवाद, क्रोध और निंदा से दूर रहें।

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