धान खरीदी केंद्र कुहीकला में भारी बवाल, किसानों के अपमान पर भड़कीं पूर्व विधायक छन्नी साहू : Chhuriya News

छुरिया (Chhuriya) : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का महापर्व अंतिम चरणों में है, लेकिन अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि अन्नदाताओं को अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। ताज़ा मामला छुरिया क्षेत्र के धान खरीदी केंद्र कुहीकला से सामने आया है, जहाँ टोकन कटने के बावजूद किसानों का धान न तौले जाने पर भारी हंगामा हुआ। इस अन्याय के खिलाफ खुज्जी की पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी चंदू साहू ने मोर्चा खोल दिया है और वे पीड़ित किसानों के साथ ट्रैक्टर में धान भरकर सीधे तहसील कार्यालय पहुँच गईं। 

Dhan Kharidi Chhuriya Times

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पूरा मामला :- 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद धान खरीदी केंद्र कुहीकला का है। सेवा सहकारी समिति कुहीकला के अंतर्गत आने वाले ग्राम टिपांगढ़ के दो किसान—चंदू साहू और परसराम गोंड़—बुधवार को अपनी उपज बेचने के लिए केंद्र पर पहुँचे थे। इन दोनों किसानों का नियमानुसार बुधवार का टोकन कटा हुआ था। टोकन कटने का अर्थ है कि समिति ने उन्हें धान लाने की अनुमति दी थी।

​                जैसे ही किसान अपना धान लेकर धान खरीदी केंद्र कुहीकला पहुँचे, वहाँ मौजूद समिति प्रबंधक और कर्मचारियों ने उनका धान तौलने से मना कर दिया। बताया जा रहा है कि समिति प्रबंधक ने 'लिमिट खत्म होने' (Limit Full) का हवाला देते हुए धान खरीदी करने से इनकार कर दिया। यह सुनकर किसान हतप्रभ रह गए। जो किसान सुबह से भूखे-प्यासे अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें शाम को खाली हाथ लौटने को कहा गया।

अधिकारियों ने नहीं सुनी फ़रियाद, तो बढ़ा आक्रोश :-

धान खरीदी केंद्र कुहीकला में हुई इस मनमानी से परेशान किसानों ने तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क साधने की कोशिश की। पीड़ित किसानों ने तहसीलदार, पटवारी और नोडल अधिकारी को फोन लगाकर अपनी व्यथा सुनाई और मदद की गुहार लगाई। लेकिन, विडंबना देखिए कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली। दिन भर इंतज़ार करने के बाद भी जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो किसानों का धैर्य जवाब दे गया। निराश और हताश किसानों ने अंततः क्षेत्र की पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी चंदू साहू से संपर्क किया और धान खरीदी केंद्र कुहीकला में चल रही धांधली की जानकारी दी।

ट्रैक्टर में धान भरकर तहसील कार्यालय पहुँची पूर्व विधायक :-

किसानों की पीड़ा सुनते ही पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू तत्काल एक्शन मोड में आ गईं। वे धान खरीदी केंद्र कुहीकला के पीड़ित किसानों के पास पहुँचीं। उन्होंने देखा कि किसान अपने धान से भरे ट्रैक्टर के साथ लाचार खड़े हैं। इसके बाद पूर्व विधायक ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए किसानों के साथ उसी ट्रैक्टर में सवार होकर सीधे छुरिया तहसील कार्यालय की ओर कूच किया।
​                        श्रीमती साहू ने धान से लदे ट्रैक्टर को तहसील कार्यालय के मुख्य गेट (Main Gate) के ठीक सामने खड़ा कर दिया और वहीं धरने पर बैठ गईं। उनके साथ पीड़ित किसान भी धरने पर बैठ गए। पूर्व विधायक ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक धान खरीदी केंद्र कुहीकला के इन किसानों का धान नहीं खरीदा जाएगा, वे यहाँ से नहीं उठेंगी।

प्रशासन में मचा हड़कंप, मनाने पहुँचे अधिकारी :-

पूर्व विधायक के धरने पर बैठते ही तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार विजय कोठारी और नायब तहसीलदार हसन सिद्दीकी तत्काल मौके पर पहुँचे। उन्होंने पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू और आक्रोशित किसानों को समझाने का भरसक प्रयास किया। ​अधिकारियों ने तर्क दिया कि तकनीकी कारणों या रकबा समर्पण की समस्याओं के कारण धान खरीदी केंद्र कुहीकला में धान नहीं लिया जा सका होगा। उन्होंने जल्द समाधान का आश्वासन दिया। लेकिन, पूर्व विधायक और किसान अपनी माँग पर अड़े रहे।

पूर्व विधायक का आरोप: अन्नदाताओं का हो रहा अपमान :-

धरना स्थल पर मीडिया से बात करते हुए पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू ने राज्य की विष्णुदेव साय सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 
"यह समझ से परे है कि टोकन कटने के बाद भी धान क्यों नहीं खरीदा जा रहा है? यदि धान खरीदी केंद्र कुहीकला में लिमिट नहीं थी, तो टोकन काटा ही क्यों गया? राजस्व अधिकारी किसानों के घर पहुँचकर जबरदस्ती धान की जानकारी ले रहे हैं और रकबा समर्पण का दबाव बना रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान सरकार अन्नदाताओं का अपमान कर रही है। जिस किसान ने मेहनत से फसल उगाई है, उसे अपनी ही उपज बेचने के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल धान खरीदी नहीं की गई, तो वे किसानों के साथ पूरी रात तहसील कार्यालय में ही चूल्हा-चौका लगाकर धरने पर बैठी रहेंगी।

​निष्कर्ष :-

​खबर लिखे जाने तक पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू और किसान अपनी मांगों को लेकर तहसील कार्यालय में डटे हुए थे। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन धान खरीदी केंद्र कुहीकला के इस विवाद को कब तक सुलझा पाता है। यह घटना न केवल कुहीकला बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

लेखक : मोहित वैष्णव 

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