ट्रैक्टर ट्राली के नीचे दबने से 13 वर्षीय मासूम की मौत, आरोपियों ने डर से खेत में फेंका शव

ग्राम मातेखेड़ा में एक ऐसा दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। गर्मी की छुट्टियों में अपने घर आए 13 साल के मासूम भावेश मंडावी की ट्रैक्टर की ट्राली के नीचे दबने से मौत हो गई। घटना के बाद घबराए ट्रैक्टर चालक प्रकाश और उसके साथी यशवंत ने बच्चे के परिजनों को इस अनहोनी की जानकारी देने के बजाय, खतरे की साजिश रची और मासूम के शव को गांव से 2-3 किलोमीटर दूर ग्राम केशोटोला के एक खेत में फेंक दिया। मामले का पर्दाफाश हुआ, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना 30 अप्रैल 2026 की शाम की है। भावेश अपने घर के सामने रहने वाले ट्रैक्टर चालक प्रकाश (उम्र 32 वर्ष, पिता अलख राम साहू) के साथ खुद ही खेत जाने की बात कहकर ट्रैक्टर में बैठ गया था। रात करीब 10:00 से 10:15 बजे के बीच खेत में मिट्टी लोडिंग-अनलोडिंग का काम चल रहा था। मौके पर प्रकाश ट्रैक्टर चला रहा था और उसका साथी जसवंत नेताम (उम्र 23 वर्ष, पिता चतुरराम नेताम, निवासी मातेखेड़ा) वहां मौजूद था।

बताया जा रहा है कि मासूम भावेश ड्रिलिंग ट्राली के पीछे का पल्ला (दरवाजा) खोलने का काम कर रहा था। इसी दौरान मिट्टी अनलोड करते वक्त ट्राली पलट गई और भारी-भरकम पल्ले के नीचे दबने से भावेश की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

आँखों के सामने हुए इस वीभत्स दुर्घटना के बाद प्रकाश और जसवंत बुरी तरह घबरा गए। इंसानियत का तकाजा था कि वे तुरंत बच्चे के परिजनों को सूचित करते, लेकिन सजा के डर से उन्होंने एक अमानवीय कदम उठाया। दोनों ने रात के अंधेरे में ही भावेश के शव को ट्रैक्टर में रखा और Gaindatola थाना क्षेत्र के नीचे आने वाले अपने गांव मातेखेड़ा से 2-3 किलोमीटर दूर, छुरिया थाना क्षेत्र के ग्राम केशटोला के एक सूनसान खेत में ले जाकर शव को फेंक दिया। इसके बाद दोनों दर्जन गांव लौट आए।

देर रात तक जब भावेश घर नहीं लौटा, तो उसके माता-पिता की चिंता बढ़ गई और उन्होंने खोजबीन शुरू की। 1 मई की सुबह जब गांव वालों ने ट्रैक्टर चालक प्रकाश से पूछा कि बच्चा कल शाम तुम्हारे साथ गया था, वह वापस क्यों नहीं आया? इस सवाल पर प्रकाश घबराने लगा और गोलमोल जवाब देने लगा। शक गहराई पर ग्रामीण मातेखेड़ा के सरपंच के पास पहुंचे।

सरपंच ने समझदारी दिखाते हुए जब ट्रैक्टर की ट्राली का मुआयना किया, तो उसमें खून के छिपे निशान दिखाई दिए। खून देखते ही सरपंच और ग्राम वासियों ने चालक प्रकाश और जसवंत पर दबाव बनाया। गुस्से और पूछताछ के आगे दोनों टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि ट्राली के नीचे दबने से बच्चे की मौत हो गई और उन्होंने घबराहट में शव को केशटोला के खेत में फेंक दिया है।

मामले की ज़िम्मेदार को देखते हुए तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। चूंकि घटना स्थल (मातेखेड़ा) गैन्दाटोला थाना क्षेत्र में आता है और जहां शव फेंका गया (केशोटोला) वह छुरिया थाना क्षेत्र में आता है, इसलिए गैन्दाटोला टीआई राजेश साहू और छुरिया टीआई कौशलेश देवांगन अपनी-अपनी टीमों के साथ मौके पर पहुंचे।

दोनों थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए बच्चे के शव को केशोटोला के खेत से बरामद किया और पंचनामा कर उसे सुरक्षात्मक के लिए भेजा दिया है। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों — प्रकाश और जसवंत नेताम — को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब घटना के हर पहलू की मजबूती से जांच कर रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक भावेश मंडावी (उम्र 13 वर्ष) के पिता रघुवीर और माता मधुर का इकलौता बेटा था और उसकी दो छोटी बहनें हैं। भावेश हॉस्टल में रहकर 6वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा था और इन दिनों स्कूल में छुट्टियां लगने के कारण वह अपने गांव माते टहला आया हुआ था। पूरा परिवार इस बात से खुश था कि बेटा घर आया है, लेकिन किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह उसकी आखिरी छुट्टियां साबित होनी चाहिए।

इस हृदयविदारक घटना से पूरे मातेखेड़ा गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। भावेश के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और उसकी दो छोटी बहनों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। एक हंसता-खेलता परिवार पल भर में उजड़ गया। वहीं, दूसरी ओर, दुर्घटना के बाद मासूम बच्चे के शव को लावारिसों की तरह स्लाइस के इस अमानवीय कृत्य से एथलीटों में दोनों एजेंसियों के प्रति भारी गुस्सा और विरोधाभास व्याप्त है। एथलीटों की मांग है कि एजेंसियों को उनके इस कृत्य के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

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