डोंगरगांव में आबकारी विभाग की दबिश, दूसरे राज्यों की 11.700 लीटर अवैध शराब के साथ तस्कर गिरफ्तार!

राजनांदगांव जिले में अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ कलेक्टर जितेन्द्र यादव (Collector Jitendra Yadav) के कड़े निर्देशों का हंटर लगातार चल रहा है। राजनांदगांव न्यूज़ (Rajnandgaon News) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, आबकारी विभाग ने डोंगरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम आरी में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदीप राजपूत के मकान पर अचानक दबिश दी। प्रभारी सहायक आयुक्त आबकारी श्री अभिषेक तिवारी के मार्गदर्शन और आबकारी उपनिरीक्षक तुलेश्वरी देवांगन के नेतृत्व में मुखबिर की पुख्ता सूचना पर बिना सर्च वारंट के मारे गए इस छापे में गवाहों के समक्ष भारी मात्रा में अवैध जखीरा पकड़ा गया। मौके से महाराष्ट्र निर्मित 76 नग (90 एमएल) देशी दारू 'संत्रा' और मध्यप्रदेश निर्मित 27 नग (180 एमएल) विदेशी व्हिस्की सहित कुल 11.700 बल्क लीटर अवैध मदिरा बरामद की गई है। प्रशासन ने इस अवैध कारोबार पर त्वरित एक्शन लेते हुए आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की विभिन्न गैरजमानतीय धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। इस सफल और ताबड़तोड़ रेड में उपनिरीक्षक मुकेश कुमार वर्मा, मुख्य आरक्षक मिलाप मंडावी, किशोरी कोमरे और दीपक सिन्हा की भी अहम भूमिका रही, जिससे पूरे इलाके में यह सख्त संदेश गया है कि कलेक्टर जितेन्द्र यादव के प्रशासन में दूसरे राज्यों से शराब लाकर खपाने वाले कारोबारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

Jitendra Yadav IAS

छापेमारी के तुरंत बाद आबकारी टीम ने आरोपी प्रदीप राजपूत को हिरासत में ले लिया और घटनास्थल से सारी अवैध शराब को जप्त कर लिया। कलेक्टर जितेन्द्र यादव (Collector Jitendra Yadav) के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे मामलों में कोई भी नरमी नहीं बरती जानी चाहिए, अतः आबकारी विभाग ने आरोपी के विरूद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की विभिन्न सख्त धाराओं के तहत गैरजमानतीय अपराध दर्ज कर एक मजबूत प्रकरण कायम किया है। इस पूरी छापामार कार्रवाई को अत्यंत व्यावसायिक ढंग से और सफलतापूर्वक अंजाम देने में आबकारी उपनिरीक्षक तुलेश्वरी देवांगन के साथ-साथ उपनिरीक्षक मुकेश कुमार वर्मा, मुख्य आरक्षक मिलाप मंडावी तथा आरक्षक किशोरी कोमरे और दीपक सिन्हा की भूमिका बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण रही। अवैध मदिरा के कारोबार के आर्थिक और सामाजिक दुष्प्रभावों का गहराई से विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि यह केवल एक कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक कैंसर है। जिन गांवों में इस प्रकार की अवैध शराब की खेप पहुंचती है, वहां पारिवारिक कलह, घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी का वातावरण पनपने लगता है। दूसरे राज्यों से तस्करी कर लाई गई इस शराब की गुणवत्ता का कोई भी मानक तय नहीं होता, जिससे अक्सर 'जहरीली शराब' के कारण सामूहिक मौतों जैसी भयावह घटनाएं भी जन्म लेती हैं। कलेक्टर जितेन्द्र यादव की दूरगामी सोच और उनका यह प्रशासनिक 'हंटर' दरअसल राजनांदगांव की इसी भोली-भाली जनता को मौत और बर्बादी के मुंह में जाने से रोकने का एक भगीरथ प्रयास है। आबकारी विभाग द्वारा की गई यह जप्ती महज एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि प्रशासन की नजरें अब केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण भारत के उन सुदूर और संकरे रास्तों तक भी पैनी नजर रखी जा रही है। राजनांदगांव न्यूज़ के माध्यम से प्रशासन आम जनता से भी लगातार यह अपील कर रहा है कि यदि उनके आसपास कहीं भी इस प्रकार की अवैध शराब बिक्री, भंडारण या परिवहन की कोई गतिविधि दिखे, तो निर्भय होकर इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। प्रशासन की यह त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई उन तमाम अपराधियों के लिए एक अंतिम और स्पष्ट चेतावनी है कि राजनांदगांव में भ्रष्टाचार और अवैध धंधों के लिए अब कोई जगह शेष नहीं है।

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