'मांस खा सकते हो, लेकिन बेच नहीं सकते': राजनांदगांव में समाज का तुगलकी फरमान, युवक का हुक्का-पानी बंद!
राजनांदगांव : आधुनिक होते समाज और डिजिटल भारत के इस दौर में आज भी 'सामाजिक बहिष्कार' जैसी कुप्रथाएं समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा और बेहद हैरान करने वाला मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक से सामने आया है। यहां एक युवक को केवल इसलिए समाज से बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए 'नॉनवेज होटल' चलाता है।
पीड़ित युवक ने समाज के कर्मियों के इस तुगलकी फरमान से परेशान होकर सीधा पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजनांदगांव के कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।
पूरा मामला क्या है?
यह पूरा मामला राजनांदगांव जिले के तुमड़ीबोर्ड चौकी क्षेत्र के नीचे आने वाले ग्राम नाथू गांव (नाथू गाँव) का है। यहाँ रहने वाले युवक कैलाश कुमार बंधे (सतनामी समाज) पिछले 7-8 वर्षों से नेशनल हाईवे के किनारे एक छोटा सा वेज-नॉनवेज होटल चलाकर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं।
कैलाश के अनुसार, समाज के प्रमुखों ने उन पर दबाव बनाया कि "तुम मांस खा सकते हो, लेकिन उसे बेच या बना नहीं सकते।" समाज के लोगों ने फरमान सुनाए कि उन्हें अपना होटल बंद करना होगा। जब कैलाश ने अपनी आर्थिक तंगी और परिवार के भरण-पोषण का हल देते हुए होटल बंद करने से इंकार कर दिया, तो समाज के लोगों ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठा लिया।
10 अप्रैल को बुलाई गई बैठक, गया 'तुगलकी फरमान' :-
पीड़ित कैलाश ने बताया कि बीते 10 अप्रैल को रात 10 बजे गाँव में समाज की एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सांप्रदायिक से यह फैसला लिया गया कि :
- कैलाश कुमार बंधे को समाज से पूरी तरह बहिष्कृत किया जाता है।
- समाज में वापस लौट और होटल चलाने के जुर्म में उन पर 21,000 रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड (जुर्माना) लगाया गया।
- सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गाँव वालों को सख्त नियम दिए गए हैं कि अगर कोई भी व्यक्ति कैलाश या उसके परिवार से बातचीत करेगा, तो उस पर भी 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

