पेट पालने के लिए गरीब ने खोला होटल तो समाज ने लगाया ₹21000 का दण्ड : Rajnandgaon

​'मांस खा सकते हो, लेकिन बेच नहीं सकते': राजनांदगांव में समाज का तुगलकी फरमान, युवक का हुक्का-पानी बंद!

राजनांदगांव : आधुनिक होते समाज और डिजिटल भारत के इस दौर में आज भी 'सामाजिक बहिष्कार' जैसी कुप्रथाएं समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा और बेहद हैरान करने वाला मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक से सामने आया है। यहां एक युवक को केवल इसलिए समाज से बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए 'नॉनवेज होटल' चलाता है।

Rajnandgaon News 2026


पीड़ित युवक ने समाज के कर्मियों के इस तुगलकी फरमान से परेशान होकर सीधा पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजनांदगांव के कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।

पूरा मामला क्या है?

यह पूरा मामला राजनांदगांव जिले के तुमड़ीबोर्ड चौकी क्षेत्र के नीचे आने वाले ग्राम नाथू गांव (नाथू गाँव) का है। यहाँ रहने वाले युवक कैलाश कुमार बंधे (सतनामी समाज) पिछले 7-8 वर्षों से नेशनल हाईवे के किनारे एक छोटा सा वेज-नॉनवेज होटल चलाकर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं।

कैलाश के अनुसार, समाज के प्रमुखों ने उन पर दबाव बनाया कि "तुम मांस खा सकते हो, लेकिन उसे बेच या बना नहीं सकते।" समाज के लोगों ने फरमान सुनाए कि उन्हें अपना होटल बंद करना होगा। जब कैलाश ने अपनी आर्थिक तंगी और परिवार के भरण-पोषण का हल देते हुए होटल बंद करने से इंकार कर दिया, तो समाज के लोगों ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठा लिया।

10 अप्रैल को बुलाई गई बैठक, गया 'तुगलकी फरमान' :-

पीड़ित कैलाश ने बताया कि बीते 10 अप्रैल को रात 10 बजे गाँव में समाज की एक बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सांप्रदायिक से यह फैसला लिया गया कि :

  1. कैलाश कुमार बंधे को समाज से पूरी तरह बहिष्कृत किया जाता है।
  2. समाज में वापस लौट और होटल चलाने के जुर्म में उन पर 21,000 रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड (जुर्माना) लगाया गया।
  3. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गाँव वालों को सख्त नियम दिए गए हैं कि अगर कोई भी व्यक्ति कैलाश या उसके परिवार से बातचीत करेगा, तो उस पर भी 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
इस बहिष्कार के बाद कैलाश के परिवार से गाँव वालों ने रोटी-बेटी का व्यवहार, आना-जाना और बोलचाल पूरी तरह बंद कर दिया है। यहाँ तक कि वे शादी-ब्याह या गामी (अंतिम संस्कार) में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं।

समाज के प्रमुखों का दोहरा रवैया उजागर :

कैलाश ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए समाज के अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "जो लोग आज मेरा हुक्का-पानी बंद कर रहे हैं, डोंगरगांव ब्लॉक के वही सहारे मेरी आंखों के सामने 4-4 किलो मछली ले जाकर खाते हैं। जब मैंने यह बात समाज की बैठक में उठाई, तो मुझे चुप करा दिया गया।" कैलाश ने रोते हुए कहा कि होटल के अलावा उनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। समाज का कहना है कि "तुम भूखे मरो या प्यासे, हमें बस अपना दंड चाहिए।"

एसपी (SP) से की शिकायत, कलेक्टर के पास जाने की तैयारी :

अपनों से ही प्रभावित होकर कैलाश बंधे ने राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। एसपी ने मामले को वारंट से लेते हुए उचित जांच और कार्रवाई का दावा दिया है। कैलाश ने बताया कि वह इस मामले की शिकायत जिले के कलेक्टर से भी करेंगे।

DG News Live और Chhuriya Times का सवाल :

बिलासपुर उच्च न्यायालय ने हाल ही में सामाजिक बहिष्कार के मामलों में सख्त नाराजगी जताते हुए प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 'नाथू गांव' में घटी यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है— क्या देश के संविधान और कानून से बढ़कर समाज के चंद पैसों के नियम हो गए हैं? जब एक व्यक्ति को उसका अपना समाज ही छोड़ दे, तो वह न्याय के लिए कहाँ जाए?

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