Uttarakhand : उत्तराखंड की वादियों में इन दिनों केवल बारूद की गूँज ही नहीं, बल्कि आपसी प्यार और रंगों की फुहार भी देखने को मिल रही है। भारत और जापान के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' (Dharma Guardian) के दौरान एक बेहद भावुक और उत्साहजनक दृश्य सामने आया, जब जापानी सैनिकों ने भारतीय जवानों के साथ मिलकर रंगों का त्योहार होली मनाया।
[Courtesy : Sidhant Sibal (X)]
रंगों में रंगे दो देशों के योद्धा :-
Social Media - X पर वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे जापानी सैनिक पूरी ऊर्जा के साथ भारतीय जवानों को गुलाल लगा रहे हैं और गले मिल रहे हैं। यह नजारा केवल एक त्योहार का नहीं था, बल्कि दो महान देशों के बीच बढ़ते भरोसे और भाईचारे का प्रतीक था। कठिन ट्रेनिंग और रणनीतिक चर्चाओं के बीच, इस छोटे से ब्रेक ने दोनों सेनाओं के बीच के मानवीय रिश्तों को और मजबूत कर दिया है।
क्या है 'धर्म गार्जियन' सैन्य अभ्यास?
यह अभ्यास भारत और जापान के बीच वार्षिक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है। इस ऑपरेशन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :-
- उद्देश्य : शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए संयुक्त क्षमता विकसित करना।
- ट्रेनिंग : इसमें दोनों देशों के जवान घातक हथियारों का संचालन, क्लोज कॉम्बैट और आपदा राहत कार्यों का साझा अभ्यास करते हैं।
- महत्व : यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत और जापान : सदियों पुराना रिश्ता :-
- बौद्ध धर्म का प्रसार : भारत और जापान को जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी बौद्ध धर्म है। छठी शताब्दी में बौद्ध धर्म कोरिया के रास्ते जापान पहुँचा, जो आज भी वहां की संस्कृति और जीवन दर्शन का मुख्य हिस्सा है।
- सांस्कृतिक समानताएं : जापान की 'सरस्वती' (बेंज़ाइटेन), 'गणेश' (कांगिटेन) और 'महाकाल' (दाइकोकुटेन) जैसे देवता सीधे तौर पर भारतीय हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरित हैं।
- आजादी की लड़ाई : आधुनिक इतिहास में, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और 'आजाद हिंद फौज' को जापान द्वारा दिया गया समर्थन दोनों देशों के बीच अटूट विश्वास की नींव बना।
- न्यायमूर्ति राधाबिनोद पाल : द्वितीय विश्व युद्ध के बाद टोक्यो ट्रायल में भारतीय न्यायाधीश राधाबिनोद पाल ने जापान के पक्ष में जो साहसी फैसला सुनाया था, उसे आज भी हर जापानी नागरिक सम्मान के साथ याद करता है।
निष्कर्ष :-
उत्तराखंड में होली मनाते इन सैनिकों की तस्वीरें यह संदेश देती हैं कि जब दो सभ्यताएं एक-दूसरे का सम्मान करती हैं, तो वे केवल सीमाओं की रक्षा ही नहीं करतीं, बल्कि दुनिया को शांति और सद्भाव का रास्ता भी दिखाती हैं। यह 'इमोशनल और डेयरिंग' मेलजोल भविष्य की एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी की ओर इशारा कर रहा है।

