छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के करीब स्थित नकटी (सम्मनपुर) गांव में हाल ही में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने दर्जनों घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ढहा दिया है। यह कार्रवाई प्रस्तावित 'विधायक कॉलोनी' (MLA Colony) के निर्माण के लिए सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के नाम पर की गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई में लगभग 77 से 85 मकानों को तोड़ा गया है। यह इलाका लगभग 9 से 15 हेक्टेयर (करीब 56 एकड़) में फैला है, जो रायपुर एयरपोर्ट से 5 किलोमीटर से भी कम दूरी पर 'नया रायपुर' (Nava Raipur) इलाके में आता है। खाली कराई गई इस जमीन पर प्रदेश के 90 विधायकों के लिए आलीशान आवास (विधायक कॉलोनी) बनाए जाने की योजना है।
तोड़े गए मकानों में कई ऐसे घर भी थे जिन्हें हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत 1.20 लाख रुपये की सरकारी सहायता से बनाया गया था। प्रशासन ने घरों को तोड़ने से पहले निवासियों को मकान खाली करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम (नोटिस) दिया था।
ग्रामीणों का पक्ष और आरोप :
ग्रामीणों का दावा है कि वे यहां 40-50 सालों (कई पीढ़ियों) से रह रहे हैं और यह जमीन मूल रूप से गांव में मवेशियों के चरागाह के लिए थी। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह जमीन अवैध थी, तो यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकारी फंड से घर कैसे पास हो गए और घरों में बिजली के स्मार्ट मीटर कैसे लग गए? ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जो फ्लैट दिए जा रहे हैं, वो 12-14 सदस्यों वाले बड़े संयुक्त परिवारों के लिए बहुत छोटे (महज एक कमरे के) हैं और उनमें बुनियादी सुविधाओं की कमी है। मानसून के ठीक पहले अचानक छत छिन जाने से बच्चों और बुजुर्गों के साथ लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन का तर्क :
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि ये सभी मकान सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाए गए थे। प्रशासन के मुताबिक, बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए नया रायपुर के सेक्टर-30 में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैट्स की व्यवस्था कर दी गई है और प्रभावित परिवारों को वहां शिफ्ट किया जा रहा है।
हम जनता की ओर से सीधे सत्ता और विपक्ष दोनों से कड़े सवाल पूछते हैं :
1. जब विधायक कालोनी नहीं बनी है, तो 90 विधायक अभी कहाँ रह रहे हैं?
हमारे विधायक कोई खुले आसमान के नीचे नहीं सो रहे हैं। वर्तमान में रायपुर के पॉश इलाके में 'विधायक विश्राम गृह' (MLA Rest House) पहले से मौजूद है, जहाँ विधायकों के ठहरने की पूरी VIP व्यवस्था है। इसके अलावा, ज्यादतर विधायकों (चाहे वे किसी भी पार्टी के हों) के रायपुर शहर में अपने खुद के आलीशान निजी बंगले और फ्लैट्स हैं।
जब इन 90 विधायकों के पास पहले से ही सुरक्षित और वातानुकूलित छत मौजूद है, तो मानसून सिर पर होने के बावजूद ऐसी क्या एमरजेंसी आ गई थी कि नकटी गाँव के 85 परिवारों की टपकती छतें रातों-रात छीननी पड़ी?
2. 90 में से कितने विधायक बुलडोजर रुकवाने गए?
छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 विधायक हैं, लेकिन जब नकटी गाँव में गरीबों के घरों पर बुलडोजर चल रहा था, तब एक भी विधायक (सत्ता पक्ष या विपक्ष) वहां मशीनों के सामने खड़ा होने नहीं गया। इसका सीधा कारण यह है कि यह 'विधायक कॉलोनी' सत्ता और विपक्ष, दोनों के लिए बन रही है। जब बात अपनी सुख-सुविधाओं (VVIP Colony) की आती है, तो पक्ष और विपक्ष की विचारधारा एक हो जाती है। गरीबों के लिए लड़ने का दावा करने वाले 90 के 90 जनसेवक उस दिन मौन थे, क्योंकि फायदा उन्हीं का होना था।
विपक्ष के कुछ नेताओं ने घर टूटने के बाद मीडिया में सिर्फ बयानबाजी की।
3. क्या 237 वर्ग किलोमीटर के 'नया रायपुर' में और कोई जमीन नहीं थी?
नया रायपुर (अटल नगर) कोई छोटी जगह नहीं है; यह 237 वर्ग किलोमीटर (करीब 8000 हेक्टेयर) में बसाया गया एक विशाल नियोजित शहर है। विधायक कॉलोनी के लिए बमुश्किल 10 से 15 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है।
नया रायपुर के कई सेक्टर्स आज भी पूरी तरह वीरान पड़े हैं। हजारों एकड़ सरकारी जमीन खाली है। शहर में बड़े-बड़े रसूखदारों, बिल्डरों और भू-माफियाओं ने सैकड़ों एकड़ पर 'असली अतिक्रमण' कर रखा है, जहाँ प्रशासन का बुलडोजर कभी नहीं जाता। खाली पड़ी हजारों एकड़ जमीन को छोड़कर, सरकार को विधायक कॉलोनी वहीं क्यों बनानी थी जहाँ 40-50 सालों से लोग बसे हुए थे? क्या सिस्टम का बुलडोजर सिर्फ इसलिए चलता है क्योंकि सामने वाला कमजोर है?
4. ₹30,000 आवास भत्ते का क्रूर मजाक और PMAY का सच!
यह वह आर्थिक डेटा है जो आम जनता को सबसे ज्यादा चुभेगा।नियमों के अनुसार, यदि कोई विधायक सरकारी आवास (बंगला) नहीं लेता है, तो उसे हर महीने ₹30,000 का 'आवास भत्ता' मिलता है। यानी एक विधायक को सिर्फ किराए के मकान में रहने के लिए साल का ₹3,60,000 मिलता है। इसके अलावा उन्हें हर महीने लगभग ₹1,15,000 फिक्स सैलरी/भत्ते, साल का 10 लाख का यात्रा कूपन और सत्र के दौरान ₹2000 प्रतिदिन का दैनिक भत्ता अलग से मिलता है (स्रोत: विधानसभा पोर्टल रिपोर्ट 2026)।
एक गरीब आदमी को जीवन भर की जद्दोजहद के बाद 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) के तहत घर बनाने के लिए सरकार कुल 1.20 लाख रुपये देती है। नकटी गाँव में इन्हीं 1.20 लाख रुपये से बने घरों को सरकार ने यह कहकर तोड़ दिया कि ये अवैध हैं। जो सरकार एक गरीब को जीवन में एक बार घर बनाने के लिए 1.20 लाख देती है और फिर उसे बुलडोजर से रौंद देती है... वही सरकार अपने विधायकों को बिना घर के रहने पर हर साल 3.60 लाख रुपये सिर्फ भत्ते के रूप में बांट देती है। क्या महीने का सवा लाख कमाने वाले और 30 हजार रुपये का आवास भत्ता लेने वाले नेताओं के लिए एक 1-BHK का EWS फ्लैट पर्याप्त नहीं है? अगर गरीबों को संयुक्त परिवार के बावजूद 1 कमरे के फ्लैट में शिफ्ट किया जा सकता है, तो विधायकों के लिए करोड़ों की लागत से नई वीवीआईपी कॉलोनी क्यों?