PM मोदी का नीदरलैंड दौरा: 17 अहम समझौतों पर लगी मुहर, TATA और ASML मिलकर बनाएंगे सेमीकंडक्टर हब, चोल साम्राज्य का ताम्रपत्र भारत आया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का नीदरलैंड दौरा (15 - 17 मई 2026): प्रमुख परिणामों (Outcomes) की सूची 

भारत के प्रधानमंत्री की 15 से 17 मई 2026 तक हुई नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए 17 अहम दस्तावेजों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी किए गए इन महत्वपूर्ण समझौतों की सटीक सूची इस प्रकार है :

1. ओवरआर्चिंग डॉक्यूमेंट (मुख्य दस्तावेज) : भारत-नीदरलैंड सामरिक साझेदारी का रोडमैप [2026-2030]

2. संस्कृति : 11वीं सदी के चोल ताम्रपत्रों (Chola Copper Plates) की भारत वापसी (Leiden University Library द्वारा भारत सरकार को)।

3. प्रवासन और गतिशीलता (Migration and Mobility) : भारत गणराज्य और नीदरलैंड सरकार के बीच मोबिलिटी और माइग्रेशन पर समझौता ज्ञापन (MoU)।

4. सेमीकंडक्टर : धोलेरा (गुजरात) में सेमीकंडक्टर फैब (Semiconductor Fab) स्थापित करने के समर्थन में TATA Electronics और ASML के बीच समझौता ज्ञापन।

5. क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) : क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के खान मंत्रालय और नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय के बीच MoU।

6. जल प्रबंधन : गुजरात के 'कल्पसर प्रोजेक्ट' (Kalpasar Project) के तकनीकी सहयोग के लिए भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच आशय पत्र (Letter of Intent)।

7. नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) : ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) सहयोग के विकास पर भारत-नीदरलैंड रोडमैप।

8. नवीकरणीय ऊर्जा : नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर नवीनीकृत MoU के तहत एक 'संयुक्त कार्य समूह' (Joint Working Group) की स्थापना।

9. ​ऊर्जा क्षेत्र : ऊर्जा क्षेत्र और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की परियोजनाओं पर सहयोग के लिए नीति आयोग (NITI Aayog) और नीदरलैंड के बीच संयुक्त आशय पत्र।

10. कृषि : पश्चिम त्रिपुरा में फूलों के लिए 'इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना।

11. पशुपालन : बेंगलुरु के पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र (CEAH) में डेयरी प्रशिक्षण के लिए 'इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना।

12. पशुपालन एवं डेयरी : भारत के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और नीदरलैंड के कृषि मंत्रालय के बीच पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में सहयोग पर संयुक्त घोषणा।

13. स्वास्थ्य : भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और नीदरलैंड के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ (RIVM) के बीच स्वास्थ्य सहयोग पर आशय पत्र।

14. ​सीमा शुल्क (Customs) : सीमा शुल्क मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता के लिए दोनों सरकारों के बीच समझौता।

15. उच्च शिक्षा : उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और नीदरलैंड के बीच MoU।

16. शैक्षणिक सहयोग : नालंदा विश्वविद्यालय (भारत) और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (नीदरलैंड) के बीच शैक्षणिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन।

17. पुरातत्व : लीडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी (Leiden University Libraries) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच समझौता ज्ञापन।

प्रधानमंत्री के इस दौरे से स्पष्ट हो गया है कि नीदरलैंड अब यूरोप में भारत का एक प्रमुख तकनीकी और रणनीतिक साझीदार बन चुका है। इन 17 समझौतों के धरातल पर उतरने से भारत के कई अहम सेक्टर्स में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे :

1. भारत बनेगा सेमीकंडक्टर का ग्लोबल हब (Tata - ASML डील) :

सबसे बड़ा और गेम-चेंजर समझौता 'TATA Electronics' और नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी 'ASML' के बीच हुआ है। ASML दुनिया की इकलौती कंपनी है जो सबसे एडवांस चिप बनाने वाली मशीनें (EUV लिथोग्राफी) बनाती है। गुजरात के धोलेरा में टाटा के नए 'सेमीकंडक्टर फैब' को ASML का सपोर्ट मिलने का सीधा मतलब है कि भारत अब स्मार्टफोन से लेकर रक्षा उपकरणों तक में इस्तेमाल होने वाली एडवांस माइक्रोचिप खुद बनाएगा। इससे भारत की चीन और ताइवान पर निर्भरता कम होगी और देश में लाखों हाई-टेक नौकरियां पैदा होंगी।

2. 11वीं सदी की सांस्कृतिक धरोहर की घर वापसी :

लीडेन यूनिवर्सिटी द्वारा 11वीं सदी के 'चोल ताम्रपत्रों' (Chola Copper Plates) को भारत को वापस सौंपना एक बड़ी कूटनीतिक और सांस्कृतिक जीत है। 21 बड़े और 3 छोटे ताम्रपत्रों का यह समूह चोल राजाओं के शासनकाल (तमिलनाडु) के इतिहास और दान-पुण्य का अनमोल सबूत है। यह भारत की खोई हुई विरासत को वापस लाने की दिशा में एक अहम कदम है।

3. गुजरात के बहुचर्चित 'कल्पसर प्रोजेक्ट' को मिलेगी रफ्तार :

खंभात की खाड़ी में मीठे पानी का एक विशाल जलाशय बनाने का 'कल्पसर प्रोजेक्ट' गुजरात का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। नीदरलैंड दुनिया में समुद्र के पानी को रोकने और 'डैम' तकनीक (जैसे उनका मशहूर Afsluitdijk Dam) में सबसे आगे है। अब जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बीच हुए समझौते से डच इंजीनियरों की विशेषज्ञता मिलेगी, जिससे इस प्रोजेक्ट के निर्माण में आने वाली तकनीकी बाधाएं दूर होंगी और गुजरात के जल-संकट का स्थायी समाधान निकलेगा।

4. ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स (भविष्य की ऊर्जा) :

पेट्रोल-डीजल का विकल्प माने जाने वाले 'ग्रीन हाइड्रोजन' के उत्पादन और निर्यात के लिए दोनों देशों ने एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले 'क्रिटिकल मिनरल्स' (महत्वपूर्ण खनिज) की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए भी बड़ा समझौता हुआ है। यह भारत को स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के क्षेत्र में दुनिया का लीडर बनाने में मदद करेगा।

5. कृषि, डेयरी और युवाओं के लिए नए अवसर :

नीदरलैंड क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद कृषि और डेयरी एक्सपोर्ट में दुनिया में दूसरे नंबर पर है। त्रिपुरा (फूलों की खेती) और बेंगलुरु (डेयरी प्रशिक्षण) में खुलने वाले 'इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' से भारतीय किसानों को खेती और पशुपालन की आधुनिक यूरोपीय तकनीक सीखने को मिलेगी। इसके अलावा 'मोबिलिटी और माइग्रेशन' समझौते से भारतीय छात्रों, आईटी प्रोफेशनल्स और कुशल कामगारों के लिए नीदरलैंड में जाकर पढ़ाई और नौकरी करना अब पहले से काफी आसान हो जाएगा।

कुल मिलाकर, वर्ष 2026-2030 तक के लिए तय हुआ यह 'स्ट्रैटेजिक रोडमैप' दर्शाता है कि भारत अब केवल आयात करने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक, ऊर्जा और सप्लाई चेन में एक मजबूत वैश्विक भागीदार बन रहा है।
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