राम-राम मोर जम्मो भाई-बहिनी अउ सियान मन ला!
आज मैं हा छुरिया टाइम्स के माध्यम से आप मन ला एक अइसे सच्ची घटना अउ बदलाव के गोठ सुनावत हौं, जेकर गवाह मैं खुद हवौं। मोला आज भी सुरता हे वो दिन, जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़त रेहेंव। मोर गाँव 'सीताकसा' ले 'गैंदाटोला' के सरकारी स्कूल लगभग 2 किलोमीटर दूरिहा रिहिस। झोला में कापी-पुस्तक धर के जब मैं रोज एके झन रेंगत स्कूल जांव, त गाँव के निकासी तीर, तरिया के तीर ले गुजरना एक सजा कस लगय। सड़क किनारे अतक गंदगी अउ मल-मूत्र रहय कि नाक ला रुमाल ले मुंद के निकले ला परय।
ये गोठ करीब 10-12 साल पहिली के आय, जब श्री नरेंद्र मोदी नवा-नवा देश के प्रधानमंत्री बने रिहिन। ओही समय केंद्र सरकार हा 'स्वच्छ भारत मिशन' के शुरुवात करे रिहिस। अउ ओकर बाद तो जम्मो गाँव में हांका पार दे गे रिहिस कि सबके घर में शौचालय बनवाना अनिवार्य हे, नहीं ते राशन-चावल नइ मिलही।
सरकार डहर ले शौचालय बनाए बर 10,000-12,000 रुपया के सहायता राशि घलो मिले ला धरिस। फेर गाँव वाले मन ला ये बात कतको नइ भाय। सब प्रधानमंत्री ला गारी देत-देत शौचालय बनवाना तो चालू करिन, फेर मन मसोस के। लोगन मन कँहय कि "अपन रहय वाला घर-दुआर में शौचालय बनवाना पाप हे, एकर ले घर म गंदगी होही।" अउ दुनिया भर के गोठ। लइका-बुद्धि म मोला घलो लगय कि गाँव वाले मन सही कहत हें।
फेर जइसे-जइसे समय बितत गिस, बदलाव आवत गिस। लोगन मन धीरे-धीरे शौचालय के उपयोग करना चालू करिन अउ ओमन ला एकर सुबिधा समझ म आवे लागिस। जे मन पहिली खुले में शौच करे ला जावय, उही मन ला अब शौचालय के अइसन आदत पड़ गे कि बाहर जाए म संकोच होवय।
देखत-देखत आज 2026 आ गे हे। आज जब मैं पाछू मुड़ के देखथौं, त लगथे कि प्रधानमंत्री मोदी जी ओ समय कतक दूरदृष्टि वाले अउ 'विकास पुरुष' साबित होइन, जेकर सुघ्घर परिणाम आज हमर आँखी के आघू हे। गाँव म 99% खुले में शौच बंद हो गे हे, सड़क अउ तरिया पार एकदम साफ-सुथरा हो गे हे। लोगन मन ला स्वच्छता के असली ज्ञान हो गे हे।
आज सोचे म घलो थोकन संकोच अउ सरम लगथे कि हमर गाँव वाले मन ला 'शौच' जइसे बुनियादी बात घलो मोदी जी हा सिखाइस। जे गाँव वाले मन ला विकास के सही मायने नइ पता रिहिस, ओमन ला स्वच्छता के पाठ पढ़ा के विकास के रस्ता म लाके खड़ा कर दिन। गाँव-गाँव म शौचालय बनवा के देश ला स्वच्छ बनाए म प्रधानमंत्री मोदी जी के ये योगदान ला कभू भुलाए नइ जा सकय।

